भारत सरकार ने Sabka Bima Sabki Raksha Insurance Laws Amendment Act 2025 को राजपत्र में प्रकाशित किया

Insurance Sector Reforms: भारत सरकार ने 21 दिसंबर 2025 को Sabka Bima Sabki Raksha (Amendment of Insurance Laws) Act, 2025 को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किया।
इसके बाद 30 दिसंबर 2025 को Indian Insurance Companies (Foreign Investment) Amendment Rules, 2025 को अधिसूचित किया गया।

यह संशोधन बीमा क्षेत्र से जुड़े तीन प्रमुख कानूनों में बदलाव करता है।
इनमें Insurance Act, 1938, Life Insurance Corporation Act, 1956 और Insurance Regulatory and Development Authority Act, 1999 शामिल हैं।

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विदेशी निवेश और संचालन से जुड़े बदलाव

संशोधित कानून के तहत बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की अधिकतम सीमा 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई है।
यह प्रावधान Insurance Act, 1938 की धारा 2(7A) में संशोधन और नई धारा 3AA के माध्यम से जोड़ा गया है।

Indian Insurance Companies (Foreign Investment) Amendment Rules, 2025 के तहत प्रशासनिक और संचालन संबंधी शर्तों में बदलाव किया गया है।
अब विदेशी निवेश वाली बीमा कंपनियों में बोर्ड और प्रमुख प्रबंधन पदों पर भारतीय नागरिकों की बहुमत अनिवार्यता नहीं रहेगी।

हालांकि, यह शर्त लागू रहेगी कि Chief Executive Officer, Managing Director या बोर्ड के Chairperson में से कम से कम एक व्यक्ति रेजिडेंट भारतीय नागरिक होना चाहिए।
यह नियम सभी विदेशी निवेश वाली बीमा कंपनियों पर लागू होगा।

49 प्रतिशत से अधिक विदेशी निवेश वाली कंपनियों पर पहले लागू अतिरिक्त प्रावधान हटा दिए गए हैं।
इनमें लाभांश वितरण, सामान्य रिज़र्व बनाए रखने और स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति से जुड़े नियम शामिल थे।

Insurance Sector Reforms: भारत सरकार ने बीमा कानूनों में किए बड़े संशोधन

शेयर ट्रांसफर, पुनर्बीमा और पंजीकरण नियम

बीमा कंपनियों में शेयर ट्रांसफर से जुड़े नियमों में भी संशोधन किया गया है।
नाममात्र शेयर ट्रांसफर की सीमा 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दी गई है।

यदि किसी ट्रांसफर के बाद किसी निवेशक की कुल हिस्सेदारी 5 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तो IRDAI की पूर्व अनुमति आवश्यक रहेगी।
यह प्रावधान पहले की तरह लागू रहेगा।

विदेशी पुनर्बीमाकर्ताओं के लिए वित्तीय आवश्यकताओं में भी बदलाव किया गया है।
भारत में शाखा स्थापित करने वाले विदेशी पुनर्बीमाकर्ताओं के लिए न्यूनतम नेट ओन्ड फंड की सीमा ₹50 अरब से घटाकर ₹10 अरब कर दी गई है।

बीमा मध्यस्थों के पंजीकरण नियमों में भी संशोधन किया गया है।
अब पंजीकरण हर तीन साल में नवीनीकरण के बजाय वार्षिक शुल्क के भुगतान पर स्थायी रहेगा।

IRDAI को पंजीकरण निलंबित या रद्द करने का अधिकार पहले की तरह बना रहेगा।
यह व्यवस्था बीमा एजेंट, ब्रोकर्स और अन्य मध्यस्थों पर लागू होगी।

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नियामकीय अधिकार और दंड प्रावधान

संशोधित अधिनियम के तहत IRDAI को अतिरिक्त निगरानी अधिकार दिए गए हैं।
अब किसी कंपनी के गैर-बीमा व्यवसाय के बीमा व्यवसाय के साथ ट्रांसफर या विलय के लिए IRDAI की मंजूरी अनिवार्य होगी।

बीमा कानूनों के उल्लंघन पर दंड प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है।
अधिकतम जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ कर दिया गया है।

दंड तय करते समय उल्लंघन की प्रकृति, अवधि और प्रभावित पॉलिसीधारकों की संख्या जैसे कारकों को ध्यान में रखा जाएगा।
ये प्रावधान Sabka Bima Sabki Raksha (Amendment of Insurance Laws) Act, 2025 के तहत लागू किए गए हैं।

यह संशोधन अधिनियम और संबंधित नियम बीमा क्षेत्र के लिए जारी किए गए आधिकारिक विधायी और नियामकीय बदलावों को दर्शाते हैं।