भारत का Electric 2-Wheeler Market जो कुछ समय पहले तक भविष्य की सवारी माना जा रहा था, अब एक अहम मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है। कभी तेज़ी से बढ़ती इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक की बिक्री अब धीमी पड़ने लगी है, और इसकी वजहें भी धीरे-धीरे साफ होती जा रही हैं।
पिछले कुछ वर्षों में सरकारी प्रोत्साहन, FAME योजना और बढ़ते ईंधन दामों ने इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को लोकप्रिय बनाया था। लेकिन अब बाजार में वह उत्साह पहले जैसा नहीं दिख रहा। बिक्री के आंकड़े बताते हैं कि कई शहरों में इलेक्ट्रिक स्कूटर की मांग स्थिर हो गई है, जबकि पेट्रोल से चलने वाली पारंपरिक बाइकों की बिक्री दोबारा बढ़ने लगी है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनी सबसे बड़ी बाधा
इलेक्ट्रिक 2-व्हीलर को अपनाने में सबसे बड़ी चुनौती चार्जिंग की समस्या बनकर उभरी है। छोटे शहरों और कस्बों में अब भी पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन नहीं हैं। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि रोज़मर्रा के इस्तेमाल में चार्ज खत्म होने का डर उन्हें पेट्रोल बाइक की ओर वापस खींच रहा है।
अपार्टमेंट में रहने वाले उपभोक्ताओं के लिए घर पर चार्जिंग की सुविधा भी आसान नहीं है। यही वजह है कि EV अपनाने का भरोसा कमजोर पड़ रहा है।
GST 2.0 का असर भी दिखने लगा
सरकार की GST 2.0 व्यवस्था ने भी उद्योग की चिंता बढ़ा दी है। इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े कई कंपोनेंट्स पर टैक्स स्ट्रक्चर को लेकर असमंजस बना हुआ है, जिससे लागत बढ़ने की आशंका है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि कीमतों में स्थिरता न होने से ग्राहक फैसले टाल रहे हैं।
पेट्रोल बाइकों की वापसी
दिलचस्प बात यह है कि जिस समय इलेक्ट्रिक 2-व्हीलर की रफ्तार थमी है, उसी दौरान ICE यानी पेट्रोल इंजन वाली बाइकों ने फिर से पकड़ मजबूत करनी शुरू कर दी है। बेहतर माइलेज, आसान रीफ्यूलिंग और सर्विस नेटवर्क की मजबूती आज भी पेट्रोल बाइकों को भरोसेमंद विकल्प बनाती है।
ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में यह ट्रेंड और ज्यादा साफ दिखाई देता है, जहां EV इकोसिस्टम अब भी पूरी तरह तैयार नहीं है।
EV इंडस्ट्री को चाहिए नई दिशा
ऑटो इंडस्ट्री के जानकार मानते हैं कि Electric 2-Wheeler सेक्टर को अब नई रणनीति की जरूरत है। केवल सब्सिडी या प्रचार से आगे बढ़कर, मजबूत चार्जिंग नेटवर्क, भरोसेमंद बैटरी टेक्नोलॉजी और स्थिर टैक्स नीति पर काम करना होगा।
साथ ही, ग्राहकों को लंबे समय की बचत और भरोसे का एहसास दिलाना भी जरूरी है। जब तक EV का इस्तेमाल पेट्रोल बाइक जितना आसान और तनाव-मुक्त नहीं होगा, तब तक बड़े पैमाने पर बदलाव मुश्किल रहेगा।
आगे क्या?
Electric 2-Wheeler Market पूरी तरह खत्म नहीं हो रहा, लेकिन यह साफ है कि यह दौर रीसेट और रीडायरेक्शन का है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार और कंपनियां मिलकर इन चुनौतियों से कैसे निपटती हैं।
भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का भविष्य अब सिर्फ सपनों पर नहीं, बल्कि ज़मीनी समाधान पर टिका है।
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यह खबर विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों पर आधारित है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि किसी भी निर्णय से पहले आधिकारिक जानकारी की पुष्टि करें।

अजय कुमार एक अनुभवी ब्लॉगर, कंटेंट क्रिएटर और डिजिटल उद्यमी हैं।
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