भारत सरकार ने Pragati Yojana के अंतर्गत बिजली क्षेत्र की 237 परियोजनाओं की निगरानी और मंजूरी दी है।
योजना मार्च 2015 में शुरू हुई थी और इसमें देरी वाली परियोजनाओं की प्रधानमंत्री स्तर पर समीक्षा की गई।
भारत सरकार ने मार्च 2015 में शुरू की गई Pragati Yojana के तहत पिछले 10 वर्षों में बिजली क्षेत्र की 237 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इन परियोजनाओं की निगरानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रत्यक्ष देखरेख में की गई।
सरकारी जानकारी के मुताबिक, Pragati (Proactive Governance and Timely Implementation) सरकार का एक मंच है, जिसके जरिए बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समयबद्ध समीक्षा की जाती है। बिजली क्षेत्र से जुड़ी इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत ₹10 लाख करोड़ से अधिक बताई गई है।
अधिकारियों ने बताया कि समीक्षा प्रक्रिया के दौरान कुल 53 बिजली परियोजनाओं को देरी के कारण चिन्हित किया गया। इन परियोजनाओं को प्रधानमंत्री स्तर पर निगरानी में लाया गया। इनका कुल मूल्य ₹4.1 लाख करोड़ आंका गया।\
देरी वाली परियोजनाओं की स्थिति
इन 53 परियोजनाओं में ट्रांसमिशन, थर्मल, हाइड्रो और कोयला खदान से जुड़ी परियोजनाएं शामिल थीं। अधिकारियों के अनुसार, इनमें से 43 परियोजनाएं, जिनकी लागत ₹3 लाख करोड़ थी, पहले विभिन्न कारणों से अटकी हुई थीं और अब उन्हें कमीशन किया जा चुका है। यह प्रक्रिया Pragati Yojana बिजली परियोजनाएं निगरानी ढांचे के तहत पूरी की गई।
| परियोजना श्रेणी | संख्या |
|---|---|
| ट्रांसमिशन | 27 |
| थर्मल | 14 |
| हाइड्रो | 9 |
| कोयला खदान | 3 |
| कुल | 53 |
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, बिजली परियोजनाओं में देरी के पीछे कई कारण रहे। इनमें भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण और वन स्वीकृतियां, पुनर्वास और पुनर्स्थापन, ईंधन आपूर्ति, उपकरणों की आपूर्ति में देरी, अनुबंध संबंधी विवाद, राइट-ऑफ-वे अनुमति, केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय से जुड़ी चुनौतियां शामिल हैं।
निगरानी व्यवस्था और चल रही परियोजनाएं
अधिकारियों ने बताया कि Pragati Yojana के तहत परियोजनाओं की निगरानी अलग-अलग स्तरों पर की जाती है। वर्तमान में लगभग ₹6 लाख करोड़ की लागत वाली 108 निर्माणाधीन बिजली परियोजनाएं इस प्रणाली के अंतर्गत निगरानी में हैं।
सरकारी बयान के अनुसार, मार्च 2015 से अब तक Pragati के तहत 50 प्रधानमंत्री स्तरीय समीक्षा बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों में परियोजनाओं की प्रगति और देरी से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की गई।
Pragati के अंतर्गत जिन प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा और निगरानी की गई, उनमें मध्य प्रदेश की गाडरवारा सुपर थर्मल पावर परियोजना, छत्तीसगढ़ की लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना (स्टेज-I), हिमाचल प्रदेश की पार्बती-II जलविद्युत परियोजना, अरुणाचल प्रदेश की पारे और कामेंग जलविद्युत परियोजनाएं, उत्तराखंड की टिहरी पंप्ड स्टोरेज परियोजना और खेतड़ी–नरेला ट्रांसमिशन परियोजना शामिल हैं।
कमीशन की गई परियोजनाओं के आंकड़ों के अनुसार, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की 20 परियोजनाएं पूरी हुईं। इसके बाद एनटीपीसी की 14 परियोजनाएं कमीशन की गईं। एनएचपीसी, नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन, टीएचडीसी और स्टरलाइट की दो-दो परियोजनाएं भी इस सूची में शामिल रहीं। इन सभी परियोजनाओं की निगरानी Pragati Yojana बिजली परियोजनाएं व्यवस्था के तहत की गई।
Disclaimer:
यह समाचार केवल सरकारी अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी और बयानों पर आधारित है। इसमें किसी प्रकार की राय, विश्लेषण या भविष्य से जुड़ा अनुमान शामिल नहीं है।

अजय कुमार एक अनुभवी ब्लॉगर, कंटेंट क्रिएटर और डिजिटल उद्यमी हैं।
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