Fast tax dispute resolution को लेकर उद्योग जगत ने बजट 2026 से पहले सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। कंपनियों का कहना है कि टैक्स नियमों में अस्पष्टता और लंबित अपीलें निवेश, कैश फ्लो और ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस पर सीधा असर डाल रही हैं।
बजट 2026 से पहले टैक्स विवादों पर उद्योग की ताज़ा मांग
उद्योग संगठनों का मानना है कि Fast tax dispute resolution के बिना टैक्स अनिश्चितता खत्म नहीं हो सकती।
एंटी-अवॉयडेंस नियमों की अस्पष्ट व्याख्या, संधि (ट्रीटी) से जुड़े विवाद और इक्वलाइजेशन लेवी को लेकर असमंजस नए टैक्स केसों को जन्म दे सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बजट 2026 में मुकदमेबाजी कम करने और अपील प्रक्रिया को तेज करने पर फोकस जरूरी है, ताकि व्यापारिक माहौल स्थिर रह सके।
लंबित अपीलें और फंसा हुआ पूंजी चक्र
डेलॉयट इंडिया के पार्टनर आशुतोष दीक्षित के मुताबिक, अपील स्तर पर देरी सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है।
उनका कहना है कि Fast tax dispute resolution के लिए अपील लंबित रहने के दौरान वसूले गए टैक्स की रिफंड प्रक्रिया आसान होनी चाहिए, जिससे कंपनियों की फंसी पूंजी मुक्त हो सके।
FICCI और CII की प्री-बजट सिफारिशों में भी टैक्स लिटिगेशन और TDS सुधार को प्राथमिकता दी गई है।
महत्वपूर्ण आंकड़े
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5.40 लाख से अधिक अपीलें लंबित
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विवादित टैक्स मांग: करीब ₹18.16 लाख करोड़
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सबसे ज्यादा बोझ Commissioners of Income Tax (Appeals) स्तर पर
उद्योग संगठनों का कहना है कि फेसलेस अपील सिस्टम में निगरानी की कमी ने इस बोझ को और बढ़ाया है।

GAAR, ट्रीटी और इक्वलाइजेशन लेवी पर अनिश्चितता
विशेषज्ञों का मानना है कि Fast tax dispute resolution के लिए नियमों की स्पष्टता उतनी ही जरूरी है जितनी प्रक्रिया की गति।
Grant Thornton Bharat की टैक्स पार्टनर रिचा साहनी के अनुसार,
GAAR के तहत “मुख्य उद्देश्य” और “tainted element” जैसे शब्दों की व्याख्या पर विस्तृत दिशा-निर्देशों की कमी है। इससे कंपनियों में अनावश्यक डर और असमंजस बना रहता है।
इसके अलावा:
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Principal Purpose Test के तहत ट्रीटी लाभ अस्वीकृत होने पर स्वतंत्र पैनल जैसी सुरक्षा नहीं
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इक्वलाइजेशन लेवी को लेकर संक्रमण काल की स्पष्टता की कमी
हालांकि 2% ई-कॉमर्स लेवी 1 अगस्त 2024 से और 6% ऑनलाइन विज्ञापन लेवी अप्रैल 2025 से खत्म हो चुकी है, लेकिन पुराने मामलों पर भ्रम बना हुआ है।
निवेश और कारोबार पर संभावित असर
उद्योग संगठन ASSOCHAM के सचिव जनरल मनीष सिंघल के अनुसार,
टैक्स में स्पष्टता और Fast tax dispute resolution से निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक वृद्धि को मजबूती मिलेगी।
उनका मानना है कि बजट 2026 में सटीक कानूनी सुधार, न्यूनतम विवाद और भरोसेमंद टैक्स व्यवस्था भारत को वैश्विक निवेश के लिए और आकर्षक बना सकती है।
FAQs
Q1. Fast tax dispute resolution क्यों जरूरी है?
क्योंकि इससे लंबित मुकदमे कम होंगे, कंपनियों की पूंजी फंसी नहीं रहेगी और निवेश माहौल सुधरेगा।
Q2. कितने टैक्स केस फिलहाल लंबित हैं?
करीब 5.40 लाख अपीलें विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं।
Q3. बजट 2026 से उद्योग की मुख्य उम्मीद क्या है?
तेज अपील निपटान, GAAR पर स्पष्ट दिशा-निर्देश और TDS सुधार।
Disclaimer
यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। टैक्स नियमों में बदलाव से पहले पाठक संबंधित सरकारी अधिसूचनाओं और विशेषज्ञ सलाह अवश्य लें।

अजय कुमार एक अनुभवी ब्लॉगर, कंटेंट क्रिएटर और डिजिटल उद्यमी हैं।
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